ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए 2024 से देश में एयर टैक्सी चलाई

ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए 2024 से देश में एयर टैक्सी चलाई जाएंगी। जमीन से दो किलोमीटर ऊपर चलने वाली टैक्सी 600 किलोमीटर का रेडियस कवर करेंगी। आईआईटी और विटॉल कंपनी ने मिलकर एयर टैक्सी का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। वर्ष 2021 में शोध का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद सिविल एविएशन (नागरिक उड्डयन) के मानकों को पूरा कर एयर टैक्सी को बाजार में लाया जाएगा। एयर टैक्सी की कीमत लगभग 150 करोड़ के आसपास होगी।

कानपुर आईआईटी के टेक्नोपार्क के स्थापना दिवस पर सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में संस्थान में अपना ऑफिस स्थापित कर चुकी सभी सात कंपनियों ने स्टॉल लगाए। आईआईटी के टेक्नोपार्क में विटॉल कंपनी ने करार किया है। कंपनी और संस्थान के वैज्ञानिक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के हेड प्रो. एके घोष की देखरेख में एयर टैक्सी पर काम कर रहे हैं। कंपनी के स्वरूप कुमार और पंकज कटारिया ने बताया कि एयर टैक्सी का प्रोटोटाइप पूरा तैयार हो गया है।


इसे दो तरीके से बनाया गया है। एक बैटरी चालित है। इसमें दो व्यक्ति बैठ सकते हैं। यह तीन घंटे में 300 किमी का सफर तय कर सकती है। दूसरा हाइब्रिड चालित है। इसमें एयर टैक्सी बैटरी से उड़ान भरेगी और फ्यूल से चलेगी। यह तीन घंटे में 600 किमी का सफर तय कर सकेगी। यह एयर टैक्सी पूरी तरह से मेक इन इंडिया होगी। 

उन्होंने बताया कि कंपनी यूएवी (मानवरहित) ड्रोन भी बना रही है। ये ड्रोन 2 किलो से 300 किलो तक के होंगे। पंकज ने बताया कि एयर टैक्सी का प्रयोग सेना के लिए भी किया जा सकता है। इसमें सेना के जवान के साथ आर्म्स रखने की व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा एमपी पुलिस और गुजरात पुलिस मानव रहित जहाज को सर्विलांस की तरह इस्तेमाल करने की इच्छुक है। 


अब बनेंगी इकोफ्रेंडली सड़कें
आईआईटी के टेक्नोपार्क और थर्मोसेंटर में इकोफ्रेंडली सड़क बनाने पर करार हुआ है। कंपनी के मनोज गुप्ता ने बताया कि वे थर्माकोल जलाने के बजाय उसमें कुछ केमिकल मिलाकर इकोफ्रेंडली सड़क बना रहे हैं। इससे सड़क बनने में बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं फैलेगा। इस तकनीक को और अधिक विकसित करने के लिए आईआईटी के साथ करार किया है।

बीमारी बताएगी मशीन
टेक्नोपार्क में आई केनोपी टेक्नो सॉल्यूशन प्रा. लि. के अनुज अवस्थी और ज्ञान प्रकाश ने बताया कि जल्द बीमारियों की जानकारी मशीन देगी। इसके लिए न तो ब्लड सैंपल लेना होगा और न ही जांच के लिए लैब भेजना होगा। अनुज अवस्थी ने बताया कि कंपनी ने अभी एक टेस्टिंग मशीन बनाई है, जो बैटरी और पानी की जांच कर रही है। अब मेडिकल डिवाइस तैयार करने को लेकर शोध चल रहा है।


देश में जल्द स्थापित होगा नेशनल रिसर्च फाउंडेशन
उच्च शिक्षा में रिसर्च को बढ़ावा देने तथा विभिन्न शोधों को कोआर्डिनेट करने के लिए देश में जल्द ही नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना होगी। इससे राष्ट्रीय प्राथमिकताएं तय कर शोध के माध्यम से मूलभूत समस्याओं को सुलझाया जाएगा।

यह बात आईआईटी कानपुर के टेक्नोपार्क के पहले स्थापना दिवस में मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने कही। उन्होंने कहा कि इसका रोडमैप तैयार कर लिया गया है। और यह सरकार की प्राथमिकता में है। 


डॉ. सारस्वत ने कहा कि फाउंडेशन का सामाजिक तौर पर भी फायदा मिलेगा। इसके तहत कृषि, पानी, प्रदूषण तथा मेडिकल के क्षेत्रों में होने वाली समस्याओं पर शोध कर साइंस और तकनीक की मदद से इन्हें सुलझाया जाएगा। इसके अलावा सन राइस तकनीक ( जिस तकनीक का आने वाले कुछ सालों में भविष्य नजर आए) पर भी काम होगा। ऐसे शोध होंगे जिससे इंडस्ट्री को फायदा पहुंचे।

कोरोना को लेकर अफवाहों का दौर
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि कोरोना वायरस को लेकर अफवाहों का दौर जारी है। नई अफवाह यह है कि चीन में हो रहे कुछ प्रयोग की वजह से ऐसी हालत हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे धरती पर आने से पहले ही करोड़ों वायरस आ जाते हैं। ऐसे में इन अफवाहों पर ध्यान देेने के बजाय निराकरण करें।