जल्लाद के रविवार शाम तिहाड़ जेल में पहुंचने के बाद से ही निर्भया के दोषियों के हाव-भाव बदलने लगे थे। मौत का खौफ उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था। रविवार रात चारों बेचैन थे और रात भर अपने सेल में चहलकदमी करते रहे। उन्हें इस बात का यकीन नहीं था कि अदालत सोमवार को उनके डेथ वारंट पर रोक लगा देगी। जल्लाद के तिहाड़ जेल पहुंचने के बाद दोषियों के गले का नाप, वजन और लंबाई नापी गई। यह सब अगले दिन होने वाली फांसी के ट्रायल के लिए किया गया। जब यह सब प्रक्रिया चल रही थी तो दोषियों को यकीन हो गया कि 3 मार्च को उन्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा। हालांकि डेथ वारंट पर रोक की जानकारी जैसे ही उन्हें मिली तो चेहरे के भाव बदल गए। जेल सूत्र के मुताबिक सारी प्रक्रिया होने के बाद सभी दोषी गुमसुम होकर अपने सेल में एक किनारे में बैठकर सोचने लगे। कुछ देर बाद सभी सेल में चहलकदमी करने लगते थे। यह सिलसिला रात भर चला। कुछ देर झपकी लेने के बाद तड़के ही उन लोगों की नींद खुल गई। अब फांसी होने का यकीन उन्हें हो गया है। इसलिए वह अपने परिवार वालों से भी मिलने से कतराने लगे हैं। सोमवार को किसी भी दोषी का परिवार वाला उनसे मिलने जेल नहीं पहुंचा। हालांकि जेल प्रशासन ने सभी दोषियों को नोटिस जारी कर परिवार वालों से अंतिम मुलाकात की बात कह चुकी है। दोषी पहले ही एक सप्ताह में दो बार अपने परिवार वालों से मिल चुके हैं।
जल्लाद के रविवार शाम तिहाड़ जेल में पहुंचने के बाद से ही निर्भया के दोषियों के हाव-भाव बदलने लगे