हिंसा करके उपद्रवियों ने भाईचारे की जड़ों को खोखला करने की कोशिश

हिंसा करके उपद्रवियों ने भाईचारे की जड़ों को खोखला करने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। इसका उदाहरण खुरेजी की नूरुल्लाह मस्जिद के कुछ लोगों ने पेश किया है। मस्जिद के कुछ लोग हिंसा प्रभावितों की मदद के लिए जीटीबी अस्पताल पहुंचे थे। मोर्चरी के बाहर उन्हें सुनीता (25) नामक गर्भवती महिला रोते हुए मिली। 


पूछताछ में पता चला कि उपद्रवियों ने उसके पति प्रेम सिंह (27) की हत्या कर दी थी। उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह उसके शव का अंतिम संस्कार कर सके। इसके बाद मस्जिद के लोगों ने रिक्शा चालक प्रेम सिंह के शव के अंतिम संस्कार का इंतजाम कराया। रविवार शाम कर्दमपुरी के श्मशान घाट पर प्रेम सिंह का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया


जानकारी के अनुसार, मूल रूप से यूपी में कासगंज के रजपुरा का रहने वाला प्रेम सिंह सी-ब्लॉक, गली नंबर-3, बृजपुरी में पत्नी सुनीता और एक छोटी बेटी के साथ रहता था। सुनीता 7 माह की गर्भवती है। रिक्शा चालक प्रेम सिंह मंगलवार सुबह करीब 8 बजे बच्ची के लिए दूध लेने के लिए घर से निकला था। इसके बाद वह लापता हो गया। परिजनों ने तलाश की तो अगले दिन उसका शव जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी में मिला।


रविवार को शव का पोस्टमार्टम हो रहा था। इसी दौरान खुरेजी के आराम पार्क स्थित मस्जिद के कुछ लोग जीटीबी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सुनीता को रोते देखकर पूछताछ की तो प्रेम सिंह की बहन सविता ने बताया कि उसके भाई की हिंसा में मौत हो गई है। सुनीता के पास उसके अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं हैं। 


मस्जिद से गए वसीम, शफीक और फिरोज ने आर्थिक मदद कर प्रेम सिंह के शव का अंतिम संस्कार कराया। कई अन्य परिवारों की भी इन लोगों ने मदद की। वसीम का कहना था कि अल्लाह ने हम सभी को इंसान बनाया है। वह भेदभाव नहीं करता तो हम धर्म और जात के नाम पर भेदभाव करने वाले कौन होते हैं।